Amīra Khusaro, Bhāvātmaka Ekatā Ke Agradūta

Front Cover
Rājapāla, 1975 - 229 pages
0 Reviews
Contributed articles on the life and works of Amir Khusraw Dihlavi (1253-1325), innovator of present-day Hindi style.

From inside the book

What people are saying - Write a review

We haven't found any reviews in the usual places.

Contents

Section 1
5
Section 2
9
Section 3
18

19 other sections not shown

Common terms and phrases

अनेक अपनी अमीर खुसरो ने अरबी आज आदि इन इस इस प्रकार इसके इसमें इसी उनका उनकी उनके उन्हें उन्होंने उर्दू उस उसका उसकी उसके उसे एक एवं औलिया कम कर करते करने कवि कविता कहा का काव्य कि खुसरो किन्तु किया है किसी की भाषा कुछ के रूप में के लिए के साथ को कोई खडी बोली खुसरो की गजल गया है गये गुरु जब जा जाता है जाती जीवन जैसे जो तक तथा तुर्क तो था थी थे दिया दिल्ली दृष्टि दो दोनों द्वारा नहीं है नाम निजामुद्दीन ने अपने पर प्रति प्रयोग प्राप्त प्रेम फारसी बहुत बात बाद ब्रजभाषा भारत भारतीय भाषाओं भी मुहम्मद में खुसरो में भी मैं यह या ये रहे वर्णन वह वाले वे शब्द संगीत सभी समय सम्बन्ध साहित्य सूफी से हम हिन्दी हिन्दी भाषा ही हुआ हुई हुए है और है कि है है हैं हो होता है होती होने

Bibliographic information