Anupalabdha-Saṃskr̥ta-rūpaka

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Pratibhā Prakāśana, 2000 - Sanskrit drama - 291 pages
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Study of rare and unpublished Sanskrit dramas.

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अंक अंक का अंक में अपनी अपने अभिनवगुप्त अर्थात् इम इस नाटक इस नाटक का इस रूपक का इसकी इसके रचयिता का इसमें इसी उदाहरणार्थ इस नाटक उद्धरण प्रस्तुत किया उपर्युक्त और कथा कथावस्तु कर करते करने कहता है कहना संभव नहीं का नाम अज्ञात का निम्नलिखित उद्धरण किया गया है की की रचना के उदाहरणार्थ इस के कारण इसका के द्वारा को जा जाने तथा तब ति पृष्ट तो था थी थे दिया नाटक का नाटक का निम्नलिखित नामक नायक नायिका ने पर पृष्ट पृष्ट ति प्रकार प्रस्तुत किया प्रस्तुत किया है प्राप्त बस भावाकाशन भी मन मुख में अन्य में मिलता है यम यया यर यश यशा यह यह एक रचयिता का नाम रम रस राजा राम रामचन्द्र रामचन्द्र ने रामायण रावण लक्ष्मण वल वह विभीषण शती या इसके शील संभव नहीं है संस्कृत से ही हुआ हुए है कि हैं हो होता है होने के कारण

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