Helārāja kā vyākaraṇa darśana ko yogadāna: jāti, dravya, evaṃ sambandha samuddeśa ke sandarbha meṃ

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Vidyānidhi Prakāśana, 2000 - Foreign Language Study - 243 pages
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Contribution of Helārāja to Sanskrit grammar with special reference to his commentary Prakīrṇakaprakāśa which is based on some sutras of Vākyapadīya by Bhartr̥hari.

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अत अनेक अपने अभाव अल अवस्था आधार आहि इन इम इस इसलिए इसी उम उसी एक एवं कथन कर करते हुए करने कहते हैं कहा क्योंकि क्रिया का किया गया है किया है किसी की कुछ के रूप में के लिए के साथ गुण घट जब जा जाता है जाति को जान जैसे जो जोध तत्व तथा तब तो दवा द्वारा दृष्टि दो दोनों नहीं है नहीं होता नाम नित्य ने पद पदार्थ पर पर भी परन्तु पवार प्रकार प्राप्त पाणिनि पृ भाव भिन्न भेद मत मान मानते मानना मानने माना में भी यक्ष यम यर यल यह यहा यहि या रहता है रहती रा रूप में रूप है लान वन वने वल वस्तु वह व्यक्ति व्यवहार वा वाराणसी वाले विशेष विषय शब्द संख्या संयोग स्पष्ट स्वरूप सामान्य सिद्ध से ही हुआ है और है कि हैं होता है होती होते होना होने होने पर होने है

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