Dhīḥ, Volume 40

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Durlabha Bauddha Grantha Śodha Yojanā, Kendrīya Ucca Tibbatī Śikshā Saṃsthāna, 2005 - Buddhist literature
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अत अनेक अन्य अपने अब अर्थात् अष्ट आचार्य आठ आदि इन इनके इस इसी उत्पन्न उल्लेख एक एवं ऐसा और कर करते करना करने का किया किया है किये की कुल के रूप में के लिए को क्योंकि गया है गुरु ग्रन्थ चार जज जा जाता है जो तथा तथागत तन्त्र तिब्बती तीन तु ते तो था दिया दीक्षा देवता दो द्वारा धर्म नहीं होता है नाम ने प० पति पर भी परन्तु पवार पास प्रकार बुद्ध भी भेद मिलता है मुख मृ० में कहा है में भी में ये मैं यक्ष यदि यब यम यमन यर यल यह या ये वल वह वाराणसी वाले विशेषता वे व्यक्ति शिष्य स० संस्कृत सभी समय साधन सं० सारनाथ सिद्धि सिद्धियों के से स्वरूप हाथ में हाथों में ही हुए है और है कि है है हैं हो होता है होती होते हैं होना होने पर

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