Janama qaida

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Bhāratīya Jānapīṭha, 1959 - Hindi drama - 191 pages
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अच्छा अजीत अपनी अपने अब अभी आज आता है आती आप आया आये आवाज इस उसे एक ऐसा और करते करना कल कह कहते कहा था कहाँ कहीं काम कालिदास किया की कुछ कैसे कोई क्या क्या हो क्यों गया है गये चली चले चाय चाहिए जब जरा जा जाता है जाती जाय जायगा जिन्दगी जी जो टेलीफोन ठीक तक तब तरफ तरह तुम तुमने तुम्हारी तुम्हें तो था थी थे दे देख देखो दो नहीं पर पास प्रकाश प्रकाशम फिर बलराज बस बहुत बात बाबू भाई भी भी नहीं मत मुझे मेरा मेरी मैं मैंने यह यहाँ यहीं या रमा रह रहा है रही रहीं है रहे हैं रेखा लिए ली लीला ले लेकिन वक्त वह वहीं विराम शादी सतीश सत्या सब साथ साहब सो हम हर हाँ हाथ ही हुआ हुई हुए हूँ है और है कि है है हो गई हो गया होगा होगी होता

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