Bhāratīya darśanaśāstra kā itihāsa

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Sāhitya Bhaṇḍāra, 1966 - Philosophy, Indic - 466 pages
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अनुमान अन्य अपने अर्थ अर्थात अविद्या आत्मा आदि इन इस इस प्रकार इसके इसलिये इसी ईश्वर उनके उपनिषद उस उसका उसके उसे एक एवं कपिल कर करके करता है करते करने कर्म कहते हैं कहा का कार्य किया है किसी की कुछ के अनुसार के आधार पर के कारण के लिये केवल को कोई क्योंकि गया है जब जा जाता है जाती जो ज्ञान तक तत्व तथा तो था थे दर्शन दर्शनों दिया दो दोनों नहीं है नाम ने न्याय परन्तु पुरुष पूर्व प्रकृति प्रत्यक्ष प्रमाण प्राप्त बात बुद्धि भी मन मीमांसा में में भी मोक्ष यदि यह यहाँ यहीं या ये योग रूप में वर्णन वह विशेष वे वेद वेदान्त वैशेषिक शंकर शब्द शरीर संसार सकता है सब सभी समय समान सम्बन्ध सांख्य सिद्धान्त सृष्टि से स्पष्ट हम ही ही है हुआ हुई हुये है और है कि है है हैं होकर होता है होती होते होने से

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