Nature of peace in Vedic literature

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Je. Pī. Pabliśiṅga Hāusa, 2007 - Political Science - 231 pages
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Study on the nature of peace in Vedic literature.

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अग्नि अथर्ववेद अध्याय अपने अर्थ आदि आरण्यक इन इन्द्र इस प्रकार ईश्वर उ० उत्पन्न उपनिषद ऋग्वेद ऋषि एक एवं और कर करके करता है करते करना करने कर्म कल्याण कहा गया है का कार्य किया गया की की गई है के द्वारा के प्रति के लिए के समान को को प्राप्त क्रो चाहिए जल जा जाता है जाते जाला जाले जीवन जो ज्ञान तत्त्व तथा तो दिया दूर दे देने देव देवता धन नहीं ने पर पाप पृथिवी ब्रह्मण भी मन मनुष्य मन्त्र मृत्यु में में भी में शम् में शान्ति यजुर्वेद यज्ञ यह यही या ये वरुण वली वह वही वायु वाला वे वेद व्यक्ति शं शब्द शान्ति के लिए शान्तिदायक संहिता संहिताओं सकता है सत्य सभी सामवेद सुख सूर्य से सोम स्वाहा हम हमें ही हुआ हुए है और है कि है जो है तथा हैं हो हों होकर होता है होती होते होने

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