Aparicitā

Front Cover
Nava Sāhitya Prakāśana, 1967 - Hindi fiction - 144 pages
0 Reviews

From inside the book

What people are saying - Write a review

We haven't found any reviews in the usual places.

Contents

Section 1
Section 2
Section 3

6 other sections not shown

Common terms and phrases

अधिक अनुभव अपना अपनी अपने अपने को अब आई आज आप आया इस उस उसका उसकी उसके उसने उसे एक ऐसा कभी कर करता करती करते कहा कहीं का कि किन्तु किया किसी की ओर की तरह कुछ भी नहीं कुर्ती के लिए के लिये के साथ केवल को कोई क्या क्षण गई गई थी गई है गया था गया है गये घर चाय जब जा जाता है जाती जाते जाने जिन्दगी जीवन जैसे जो डल तक तब तुम तो था थी थे दिन दिया दिल दूर ने पर परीती फिर बहुत बात बार बाहर मन मुझे में मेरा मेरी मेरे मैं मैंने यह यहाँ रह रहा रहा है रही रहीं रहे लगता है लगा लगी लिया लेकर लोग वह वैसे ही शायद श्रीनगर सब समय सा साथ सी सुनीता से हम हाथ ही हुआ हुई हुए हुये हूँ है और है कि हैं हो गई होता है होती

Bibliographic information