Kavitāvalī: sandarbha aura sandarbha

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Grantham, 1976 - 55 pages
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१२ १४ अंगद अपने अभिव्यक्ति अयोध्या० आदि इस उसके उसे एक और कबीर कर करते करना करने कवि का कवितावली कहता कहना कि राम का उल्लेख उत्तर० का यह कहना का रावण से का वर्णन काशी कि राम के किया किसी की कुछ के रूप में के लिए के समान के साथ केवल कैकेयी को देख कोई क्या गई जाना जाने जो तक तथा तुलसी तुलसी का तुलसीदास तो था थे दशरथ देखकर द्वारा रावण नहीं नाम ने पर पर राम परशुराम परिवेश पार्वती प्रकार प्रेम बन ब्रह्मा भी यह कहना कि या युद्ध रक्षा रहा राक्षसों राम के राम द्वारा रावण को लंका लंका० लक्ष्मण वन वाले विभीषण विष्णु वे शंकर शिव संसार में सब सीता सीता को सीता से सुग्रीव सुनकर सुन्दर० से कहना कि सौन्दर्य हनुमान का ही हुए है है उत्तर० है बाल० हैं हो होकर होता होना होने पर

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