Mokṣākaraguptaviracitā Bauddha-tarkabhṣ̄ā

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Prācya Prakāśana, 1969 - Buddhist logic - 138 pages
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अनुमान अनेक अन्य अपने अभाव अर्थ आत्मा आदि आदि के इति है इस प्रकार इसलिए उत्पन्न उस उसका एक एव एवं करने कहा गया है कहा जाता है का कार्य किसी की कुछ के द्वारा के लिए कैसे को कोई ग्रहण घट जाता है कि जाती जैसे जो ज्ञान तथा तब तस्य तु दो दोनों दोष द्रव्य नहीं है नहीं है क्योंकि नहीं होता नाम नित्य ने न्याय पक्ष पर भी प्रकार के प्रत्यक्ष प्रत्यय प्रमाण प्रयोग भी भेद मत मात्र मानना माना में में भी यथा यदि यह यहाँ या रूप वस्तु वा वाला वाले विशेषण विषय व्यक्ति शब्द सकता है सभी समय सम्बन्ध साधन साध्य सामान्य सिद्ध से स्वभाव स्वरूप हि ही हेतु हेतु का है और है कि है जैसे है तथा है तो है न है यह है वह है है हैं हो जाता हो सकता होगा होता है होती होने के कारण होने पर

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