Dhanvantaritantraśikṣā

Front Cover
Gaṅgāvishṇu Śrīkr̥shṇadāsa, 1985 - Tantras - 168 pages
0 Reviews

From inside the book

What people are saying - Write a review

We haven't found any reviews in the usual places.

Contents

Section 1
Section 2
Section 3

23 other sections not shown

Common terms and phrases

अथवा अनन्तर अपने इति इत्यादि इन इस प्रकार इसके उक्त उत्पन्न उस उसके ऊपर एक ओं और कर करके करता करता है करती हो करते हैं करना चाहिये करनी करने करनेवाली करनेसे करे कवच कहा किसी की के को कोई क्या जप जा जाता है जिस जो जो पुरुष तत तथा तीन तु तुम तुम्हारे तुम्हीं ते तो देवता देवि देवी दोनों द्वारा धारण ध्यान नम नहीं नारायणी पद पर परम पाठ पातु पूजा करे प्रदान प्राप्त फिर बलि बीज ब्रह्मा भय भी भेरी भैरवी मंत्र मंत्रसे मलय मस्तक झुकाकर मात में मैं यदि यह यहीं रक्षा करे रा लिखा है वह वा शव शिरसा शिव श्री संपूर्ण सदा सब समय समान सहित साधक सिद्धि से स्थान स्वाहा है हि ही हुआ हुई हुए हूँ हे है कि है जननि है देवि है है हैं होकर होता है होती होम

Bibliographic information