Hindī nāṭaka aura raṅgamańca

Front Cover
Pańcaśīla Prakāśana, 1988 - Performing Arts - 178 pages
0 Reviews
Hindi drama and theater; papers read at a seminar organized by the Hindi Dept., Marathwada University, Nov. 19-24, 1984.

From inside the book

What people are saying - Write a review

We haven't found any reviews in the usual places.

Common terms and phrases

अधिक अन्य अपनी अपने अभिनय अभिनेता अभिव्यक्ति अर्थ आज आदि आधुनिक इन इस इसलिए इसी उनके उसकी उसके एक एवं कर करता है करते करना करने के कहा का किया किया है किसी की भाषा कुछ के कारण के रूप में के लिए के साथ को कोई गया है चाहिए जा सकता है जाता है जीवन जैसे जो तक तथा तरह तो था थी थे दर्शकों द्वारा दिया दृश्य दृष्टि से दोनों नये नहीं नाटक के नाटक में नाटककार नाटकों नाटकों का नाटकों में नाट्य रचना निर्देशक ने पर परंपरा प्रकार प्रभाव प्रयोग प्रस्तुत प्रसाद पृ० बहुत बात बाद भारत भारतेन्दु भी मंच मोहन राकेश यथार्थ यह या युग रचना विधान रंग रंगमंच की रंगमंच पर वह वाले विचार विधान वे शब्द शिल्प शैली सभी समकालीन समय संगीत संवाद स्थान स्थिति साहित्य से हम ही हुआ हुई हुए है और है कि हैं हो होता है होती होते होने

Bibliographic information