Īśvaravilāsamahākāvyam of Kavikalanidhi Devarshi Shrikrishna Bhatta

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Jagadīśasaṃskr̥tapustakālayaḥ, 2006 - 450 pages
Sanskrit epic poetry with Sanskrit commentary and Hindi translation.

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11 अनुवाद 11 अन्वय 11 विलासिनी 11 विशेष अत अनेक अपनी अपने अपि आदि आमेर इति इव इस इस प्रकार ईंश्वरीसिंह ईश्वर उत्पन्न उल्लेख उस उसके उसे एक एव एवं एष और करता करते करने वाले कहा का किन्तु किया किया है की के कारण के लिये के समान के साथ को क्रो गया गयी गये चन्द्र चुका जयन्ति जयपुर जयसिंह जयसिंह ने जा जिस जो तक तत्र तथा तस्य ते तो था थी थे धारण नहीं नाम नामक ने पद्य पर पुत्र पृथ्वी प्राप्त बाद बादशाह भी महाराज मानसिंह मुगल मृत्यु में में भी यज्ञ यत्र यथा यस्य यह यहाँ या युद्ध ये रहा रहे राजस्थान राजा राज्य रूप लिया वर्णन वह वाला विलासिनी विष्णु शिवाजी समय समस्त सवाई सुशोभित से से युक्त सेना ही हुआ हुई हुए है है कि हैं हो होने

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