Śrī Śrī Mahārājī prādurbhāvaḥ: Bhr̥ṅgīśasaṃhitā-taḥ

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K. N. Dhar
Shri Parmananda Research Institute, 1981 - Body, Mind & Spirit - 104 pages
Hymn to Mahārājī, form of Tripurasundarī, Hindu deity.

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१० अत अथवा अन्य अपनी अपने अब अभी अयोध्या अर्थ आप इत्यादि इन इस प्रकार इसका इसी इसे उस उसे एक और कर करके करता है करते करने कश्मीर का कारण किसी की की ओर के प्रति के लिए को कोई क्या गई है गय गया है जब जिस जिसे जी जो तक तथा तामसी तो त्रिपुरा था थी दिया देने देबी देवी द्वारा धारण ध्यान नहीं नाम से नारद ने पर पर्वत पांचाल पूजा प्र प्रस्तुत प्राप्त प्रिय फिर बन बी ब्रह्मा भगवती भगवान भी भी है मन्दोदरी महादेव महामाया माहात्म्य में में भी यह यही यहीं रा राम रावण रुप लंका वर वह वहीं वाली वाले विभीषण शब्द शिव श्यामा श्री सब समय साथ सीता से स्थान स्वयं हनुमान ही हुआ हुई हुए हूँ है कि है है है० हैं हो होकर होता है होने

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