Śrī Śrīujjvalanīlamaṇi

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Vrajagaurava Prakāśana, 1991 - Poetics - 324 pages
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अति अथ अनुवाद अपनी अपने अब अर्थात् इस इसलिये उदाहरण उनके उस उसका उसकी उसके उसे एक एवं और कर रही करके करता है करती करते हुए करने कहते हैं कहा कहा-हे का कारण किन्तु किया किसी की कुछ कृष्ण के प्रति के लिये के साथ को कोई क्या गया है गयी गये गोवर्धन चन्दावली जब जा जी के जो तथा तब तुम तुम्हारे तो था थी दर्शन दिया दूर देखकर दो दोनों द्वारा धारण नहीं नहीं है नायिका पर प्रकाशित प्राप्त प्रेयसी फिर बात भाव भी भेद मान मुख मुझे में में श्रीकृष्ण मेरी मेरे मैं यथा यमुना यह या रहा है रही रहीं रहे हैं रूप लगी ललिता वर्णन वह वा वे श्रीकृष्ण के श्रीराधा जी श्रीराधा जी ने सखि सखियों सखी सब समय समस्त सामने से ही हुआ हूँ हे है कि हो रहा होकर होता है होती होते होने

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