Śrī Parātriṃśikā: Abhinava Gupta viracita vivṛti sameta mūla saṃskṛta śodhita pāṭha, Hindī anuvāda, svatantra ṭippaṇiyāṃ

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Motīlāla Banārasīdāsa, 1985 - Kashmir Śaivism - 497 pages
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Work on Trika philosophy in Kashmir Sivaism; with Sanskrit commentary by Rājānaka Abhinavagupta.

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अत अथवा अपनी अपने अभिप्राय अर्थ अर्थात् अवस्था अवस्थित इति इत्यादि इन इस प्रकार इसका इसके इसी उस उसी एक एव एवं ऐसा ओर और कर करके करने के कहते कहा का किया गया है किसी की के अनुसार के द्वारा के रूप में के लिए के साथ केवल को कोई क्योंकि गई जा जाता है जाती जाने जो तक तत्व तु तो दूसरे दो दोनों धारण नहीं ने पर परन्तु परमेश्वर परिपूर्ण पहले पृथिवी प्रकार के प्रत्येक प्रस्तुत बन भगवान भाव भी भूमिका मध्यमा में ही यदि यह यह कि यहाँ पर या ये रहता है रहती रूपों वर्ण वर्तमान वह वाली वाले वास्तव में विषय वे शक्ति शब्द शिव सकता सारे सृष्टि से ही स्पष्ट स्वयं स्वरूप ही है हुआ हुई हुए है और है कि है है हैं हो जाता है हो जाने होता है होती होने के कारण

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