ग्रहण से चाँद मैला नहीं होता (उपन्यास)

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Sahityapedia Publishing, Jun 15, 2020 - Fiction - 166 pages
सच्चे अर्थों में अलौकिक प्रेम ही वास्तविक प्रेम होता है। लौकिक प्रेम तो महज़ औपचारिक होता है। अलौकिक प्रेम की प्राप्ति हर किसी के लिये सम्भव नहीं, यह बिरले लोगों को ही प्राप्त होता है। अलौकिक प्रेम का होना रूह की उदात्तता पर निर्भर करता है, वरना लौकिक प्रेम तो हर किसी को सहज सुलभ है। अगर किसी का रूहानी प्रेम आजीवन जिस्मानी सानिध्य को भी प्राप्त होता है तो वह एक-दूसरे की इबादत है, पूजा-आराधना है और समाधि की अवस्था की प्राप्ति के लिये स्वर्ण-सोपान है।
 

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Common terms and phrases

अपना अपनी अपने अब अभी आई आज आया इस इसलिये उस उसकी उसके उसने उसे एक और सुमित कभी कर करता करते करना करने का किया किसी की कुछ के बाद के लिए के लिये के साथ कोई क्या क्यों खाना गई गया गयी गये घर चल चला छोटे जब जा जाने ज़िन्दगी जीवन जो टेरेस डैडी तक तब तरह तुम तुम्हारी तुम्हें तो था थी थे दिन दिया दी दे देर दो दोनों नही नहीं ने सुमित पढ़ाई पर पहले पास पिता पिताजी प्यार फिर बस बहुत बात बार बीच भी मन महसूस माँ ने मुझे में मेरे मैं यह या रहा था रहा है रही रहे रात लगा लिया ले लेकर लेकिन वह विवाह शादी सब समय सामने सुनीता के सुमित को सुमित ने से सोच हर हाथ ही हुआ हुई हुए हूँ है और है कि हैं हो हो गया होगा होगी होता होने

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