Abhidhāvr̥ttamātr̥kā

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Caukhambā Vidyābhavana, 1973 - Sanskrit literature - 142 pages
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अत अन्य अपने अभिधा अभिनवगुप्त अर्थ का अर्थात् आदि आनन्दवर्धन आहि इति इन इस प्रकार इसलिए इसी उक्त उदाहरण उनके उपचार उपादान उस उसका उसके उसमें उसी उसे एक ऐसा कर करते हैं कश्मीर कहा क्योंकि कारण किन्तु किया किसी की कुछ के आधार पर के द्वारा के लिए के साथ केवल को कोई जब ज्ञान जा जाता है जाति जो तक तथा तब तु तो था थे दिया दो दोनों नहीं है नाम नामक ने पदार्थ पहले प्रकार की प्रतीति प्रथम प्रयोग प्रयोजन प्रस्तुत बाद बोध भी भेद मम्मट मातृका मानते माना मुकुल मुख्य अर्थ में भी यथा यह यहाँ या ये रहता है रहा रहे लक्षणा वस्तु वह वहाँ व्यक्ति वाक्य वाले विषय वे शब्द का सकता सभी सम्बन्ध स्पष्ट स्वीकार से हि ही ही है हुआ हुए है और है कि है वह है है हैं हो होगा होता है होती होते होने

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