Aj˝eya aura Mukttibodha kī pratinidhi kavitāem̐

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Anurāga Prakāśana, 1998 - Hindi poetry - 139 pages
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Selected poetic works of Sachchidanand Hiranand Vatsyayan, b. 1911, Hindi author and Gajanan Madhav Muktibodh, 1917-1964, Hindi poet; includes extensive introduction and comments on their poetic works.

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अँधेरे अजेय अधिक अनेक अपनी अपने अब अभिव्यक्ति अर्थ आगे आदि इन इम इस इसलिए इसी उन उनकी उनके उन्होंने उम उस उसकी उसके उसी उसे एक और कर करके करता है करती करते करने कवि कवि के कविता के कविता में कविताओं में कहीं का काव्य किया है किसी की कुछ के रूप में के लिए को कोई गया है गयी गये चल जल जा जाता है जीवन जैसे जो तक तथा तरह तो था थी थे दिया देता है दोनों नयी कविता नये नहीं है नामवर सिंह ने पर प्रकार प्रतीक प्रतीकों प्रयोग फिर बन बरगद भी भेरी मन मनु मुक्तिबोध मुहिबिधि में भी मैं यक यम यमन यर यल यह यहाँ यही या ये रहा है रही रहे रो लिब लिया लेकिन वन वया वह वीणा वे से ही हुआ हुई हुए हूँ है कि है है हैं हो होता है होती

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