Anātha Bhagavān, Volume 1

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Śrī Javāhara Sāhitya Samiti, 1977 - Jainism
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Life and teachings of Muni Anātha, exponent of Jainism.

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अगर अतएव अनाथ अनाथता अपना अपनी अपने अब अर्थ आत्मा आदि आप इस प्रकार इसी ईश्वर उन्हें उस उसी उसे एक ऐसा कथन कर करके करता करते हैं करना करने करने के कहते कहा का काम कामदेव किन्तु किया किसी की कुछ के कारण के लिए के साथ कैसे को कोई क्या गया है चाहिए जब जा सकता जाता है जाती जाय जो तक तब तुम तो था थी थे दिया दु:ख दूर देने धर्म नहीं है नाथ ने पर परन्तु पास प्रधान फिर भी बन बहुत बात मनुष्य मुझे मुनि मुनि के में मेरा मेरी मेरे मैं यदि यह यह है कि यही या रहा है राजा रूप रोग लोग वह वाला वाले विचार वृक्ष वे शरीर शास्त्र श्रेणिक संसार सकता है सकती सकते सनाथ सब समय साधु सूर्य से स्वयं ही हुआ हुए हूँ है और है कि है है हो होगा होता है होती होने

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