Athāto kāvya jij˝āsā

Front Cover
Vāṇī Prakāśana, Jan 1, 1996 - Poetry - 316 pages
0 Reviews
Study of 20th century Hindi poetry.

From inside the book

What people are saying - Write a review

We haven't found any reviews in the usual places.

Contents

15
मुनसुत्र्थाकन 9
26
शमशेर को वावानुभूमि था विजयदेव रामण माही
37

8 other sections not shown

Other editions - View all

Common terms and phrases

अजेय अत अधिक अनुभव अपनी अपने अब अर्थ आज आदमी इस उन उनकी उनके उन्हें उस उसका उसकी उसके उसे एक एवं ऐसा कम कर करता है करती करते हैं करना करने कल कवि कवि को कविता को कविता में कविताएँ कविताओं में कवियों कहीं का किया है किसी की कुछ के लिए केदारनाथ को कविता को तरह कोई गया है चेतना चौवन जब जा जाता है जाती जिस जीवन जैसे जो तक तथा तो था थी थे दिया दृष्टि देश दो धुमिल नहीं है निराला ने पर प्रकृति फिर बस बहुत भी भेरी मनुष्य मर मैं यक यम यल यश यह यहाँ यही या ये रचना रहा है रही रहे रूप में रे लेकिन वन वया वल वस वह वे शब्द शब्दों शमशेर सकता है समय साथ से स्थिति हम ही हुआ हुई हुए है और है कि है है हैं हो होता है होती होने

Bibliographic information