Bhāratīya kāvyaśāstra ke naye āyāma: Rasa siddhānta

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Penamaina Pabliśarsa, 1992 - Indic poetry - 287 pages
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Study of Indic poetics with special reference to Hindi, Marathi, and Sanskrit literature.

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अत अथवा अधिक अन्य अनुभव अनुभूति अनेक अपने अभिनवगुप्त आचार्य आचार्यों आदि आधार पर आधुनिक आनन्द इन इनके इन्होंने इस प्रकार इसी उसके उसे एक कर करके करता करते करना करने कवि क्योंकि का कारण काव्य किया है किसी की की स्थिति की है के लिए को को ही गया है जा जाता है जी जो डा० तक तत्व तथ तथा तादात्म्य तो था दिया दोनों नहीं है ने पर परन्तु प्रतिपादन प्रतीत प्रस्तुत प्राप्त पृ पृ० भक्ति भरत भावना भावनाओं भावों भावों की मन मराठी मान्यता मूल में भी यह या रति रस की रस के रसों रूप में वह वाटवे विवेचन विशेष विषय वे शब्द श्री शारीरिक शुक्ल सकता सभी समर्थन सहृदय सहृदय के संचारी संस्कृत स्थायी भाव स्पष्ट स्वतन्त्र स्वरूप स्वीकार साहित्य से हिन्दी ही हुए है और है कि है है हैं हो होगा होता है होती होते हैं होने

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