Bhāratīya saṅgīta kā itihāsa

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Saṅgīta Risarca Ekeḍemī, 1994 - Music - 425 pages
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अध्याय
४ ब वैदिककाल
३ दैहिक काल १४३४
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अत अथवा अध्याय अपने अब अभिनवगुप्त अर्थ अर्थात अल इत्यादि इन इस प्रकार इसका इसके इसी उगे उन्होंने उपर उलझा उस ऋग्वेद एक एल कर कहते कहा का की कुछ के लिए केवल को गया है गये गान ग्रन्थ जा जाता है जिन्तु जिया है जिस जी जो तक तीन तो था थी थे दिया दो द्वारा नही नहीं है नाम नारद नि ने पता पर पल पहले पाणिनि पुराण प्रयोग प्राचीन बने बल बहुत बार बीजा भरत भारत भी मध्यम मिलता है मृ० में मैं यदि यने यब यम यया यर यल यश यस यह भी यह है यहीं या ये रं रपट रहा रा राम रामायण रो लिया वर्णन वाद्य विशेष विषय विष्णु शती शब्द शिक्षा शिया श्री संगीत समय सुमेर से स्वर हम ही हुआ है हुई हुए है और है जि है यह हैं हो होता है होती होते

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