Bhāshāvij˝āna aura Hindi

Front Cover
Bhāratīya Vidyā Bhavana, 1957 - Hindi philology - 252 pages
0 Reviews

From inside the book

What people are saying - Write a review

We haven't found any reviews in the usual places.

Contents

Section 1
Section 2
Section 3

10 other sections not shown

Other editions - View all

Common terms and phrases

अथवा अध्ययन अधिक अन्य अनेक अपने अब अर्थ अवधी अंग्रेजी आदि आधार आधुनिक आर्य इन इस प्रकार इसका इसके इसमें इसी उच्चारण एक कभी कर करने क्रिया का प्रयोग का विकास काल किया किसी की कुछ के अनुसार के कारण के रूप में के लिए के लिये केवल को कोई गई गया है गुजराती जब जाता है जाती जाते जैसे जो डा० तक तथा तेलगु तो था थी दो दोनों ध्वनि ध्वनियों नहीं नाम ने पर परिवर्तन पश्चिमी पहले पंजाबी प्रकट प्रचलित प्रभाव प्रयुक्त प्राकृत प्राचीन पूर्व फारसी बाद बोली भारत भारतीय भाषा के भाषा में भाषाओं के भाषाओं में भिन्न भी भोजपुरी माना मिलता है मिलती मिलते हैं मूल में भी मैथिली यह या ये योग लिपि वह वाक्य विशेष वे शब्द शब्दों के सभी संज्ञा संबंध संस्कृत स्पष्ट से हम हिन्दी के ही हुआ हुए है और है कि है है हैं होता है होती होते होने

Bibliographic information