Bhāshikī, Volume 1

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Bholānātha Tivārī, Ravīndranātha Śrīvāstava, Krishan Kumar Goswami
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3
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6
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१० अत अनुभूति अन्य अपनी अपने अर्थ अहे आदि आम आल आह इन इस प्रकार इसी उस उसकी उसके एक एवं और कर करता है करते करने का का प्रयोग किन्तु किया किसी की कुछ के साथ केलिए केवल को कोई जब जाता है जाती जि जिस डॉ० तक तथा ता ति तीन तो तो प्र दृष्टि दो दोनों नहीं है नाम ने पर पाणिनि पी० प्र प्रकट प्राय बात भारतीय भाव की भाषा के भाषा में भाषाविज्ञान भी मध्यमा यदि यम यय यया यल यह या ये रहती है रा रूप से वह विचार विशेष विशेषण विश्लेषण वे शब्द शैली श्री संख्या सकता है सकते समय सा सा० सातों साय साहित्य साहित्यकार से सौ सौ1० स्थिति स्पष्ट हम हमारे हिंदी ही हुए है और है कि है जो है है है० हैं हो होता है होती होते होने

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