Candrakalā nātika: Chandrakala natika. Ācāryaviśvanāthapraṇītā. Saṃskṛta Hindī vyākhyā samanvitā. Sampādaka Prabhātaśāstrī. Saṃskṛta vyākhyākāra Tariṇtśa Jha. Hindī anuvādaka Śiva Śankara Tripāṭhī

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Devabhāsā Prakāśana - Sanskrit drama - 175 pages
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अत्र अनुराग अपनी अपने अब इति इव इस इसके उनके उस उसके उसे ऊपर एक एव एवं एष ऐसा और कर रहा करके करता है करती करने कहकर का कामदेव किया की के कारण के लिए के साथ को क्या खलु गया चन्द्रकला चन्द्रमा चन्द्रशेखर चाहिए चित्ररथ छन्द जाता है जाती जैसे जो तक तत तथा ता तुम ते तो था दिया दे देखकर देबी देवी दोनों द्वारा नहीं नाटिका नाम ने पर पुन प्रति प्रवेश प्रिय भी मन मम मया महाराज महारानी मित्र मुझे मू० पा० में मेरी मेरे मैं यथा यदि यस्य यह यहाँ युक्त येन रत्नावली रहा है रहीं रहे रा रूप में वह वा विदूषक विश्वनाथ सखी समय समस्त सह सा से सोचकर स्वयं ही हुआ हुई हुए हूँ है और है कि हैं हो होकर होता है होने ह्रदय

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