Chāyāvādottara kāvya meṃ śabdārtha kā svarūpa

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Bāphanā Prakāśana, 1972 - Hindi poetry - 431 pages
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अज्ञेय अत अथवा अधिक अनेक अन्य अपनी अपने अभिव्यक्ति अर्थ का आज आदि इन इस प्रकार इसी उदाहरण उपर्युक्त उर्दू उस उसके एक एवं ओर कर करता है करते करने कवि कवियों ने का अर्थ का प्रयोग काव्य में किन्तु किया है किसी की कुछ के कारण के लिए को कोई गया है गयी ग्रहण चित्रण छायावादी जगदीश गुप्त जा जाता है जाते जीवन जैसे जो तक तथा तरह तो था थे दिया दृष्टि दो द्वारा धर्मवीर भारती नयी कविता में नये नवीन नहीं नाम पर परिवर्तन पृ० प्रकृति प्रगतिवादी प्रतीक प्रतीक शब्द प्रयोगवादी बहुत बिम्ब भाषा भी मन में भी यह या युग ये रहा है रहे रूप में लक्षणा वह विभिन्न वे व्यक्ति शब्द के शब्दन शब्दों का संस्कृत सप्तक सम्बन्ध सामाजिक साहित्य से स्पष्ट हम हिन्दी ही हुआ है हुई हुए है और है कि हैं हो होता है होती होते होने

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