Chidambara

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Rajkamal Prakashan, Jan 1, 1991 - 353 pages
छायावाद के प्रमुख स्तम्भ सुमित्रानंदन पंत की काव्यचेतना का प्रतिबिम्बन है ‘चिदंबरा’। इसमें कवि के 1937 से 1957 तक की बीस वर्षों की विकास-यात्रा की झलक मिलती है। स्वयं पंत ने स्वीकार किया है कि ‘चिदंबरा’ में उनकी भौतिक, मानसिक, आध्यात्मिक संचरणों से प्रेरित आन्तरिक लयबद्धता व्याप्त है। ‘युगवाणी’ से लेकर ‘अतिमा’ तक की रचनाओं के इस संचयन में पंत की काव्य-चेतना का संचरण ‘चिंदबरा’ में परिलक्षित होता है। पंत ने भौतिक और आध्यात्मिक दोनों दर्शनों से जीवनोपयोगी तत्त्वों को लेकर अपनी रचनाओं में भरे-पूरे मनुष्यत्व का निर्माण करने का प्रयास किया है जिसकी आवश्यकता आज भी बनी हुई है।
 

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अंतर अपनी अपने अब अमर आज इस उर एक और कर करता करती करते करने कवि का काल किया की कुछ को क्या क्षण गए गया घन चिर चेतन चेतना छन छाया जग जड़ जन जल जाता जीवन के जो ज्यों ज्योति तथा तन तम तुम था थी थे दृष्टि दो धर धरती धरा नभ नव नवीन नहीं निज नित ने पथ पर प्रकाश प्राण प्राणों प्रिय प्रीति प्रेम फिर फूलों बन भर भव भारत भाव भी भीतर भू भू पर मधु मधुर मन मन के मन में मनुज मानव मानवता मानस मुक्त मुख मुझे में मेरी मेरे मैं मैंने मौन यह यहाँ युग के रंग रजत रहा रही रहे रूप रे लोक वन वह वाणी विकसित विकास विश्व वे शत शांति शोभा संस्कृति सत्य सब सा सी सुंदर सुख सूक्ष्म से स्मित स्वप्न स्वप्नों स्वर स्वर्ग स्वर्णिम हम हित ही हूँ हृदय हे है हैं हो हों

About the author (1991)

सुमित्रानंदन पंत जन्म: 20 मई, 1900 कौसानी (उत्तरांचल में) । शिक्षा: प्रारम्भिक शिक्षा कौसानी के वर्नाक्यूलर स्कूल में। 1918 में कौसानी से काशी चले गए, वहीं से प्रवेशिका परीक्षा पास की। प्रकाशित पुस्तके : कविताा-संग्रह: वीणा, ग्रन्थि, पल्लव, गुंजन, ज्योत्स्ना, युगपथ, युगवाणी, ग्राम्या, स्वर्णकिरण, स्वर्णधूली, मधुज्वाल, उत्तरा, रजत-शिखर, शिल्पी, सौवर्ण, युगपुरुष, छाया, अतिमा, किरण-वीणा, वाणी, कला और बूढ़ा चाँद, पौ फटने से पहले, चिदंबरा, पतझर (एक भाव क्रान्ति), गीतहंस, लोकायतन, शंखध्वनि,शशि की तरी, समाधिता, आस्था, सत्यकाम, गीत-अगीत,संक्रांति, स्वच्छंद ! कथा-साहित्य : हार, पांच कहानियां ! आलोचना एवं अन्य गद्य-साहित्य : छायावाद : पुनर्मूल्यांकन, शिल्प और दर्शन, कला और संस्कृति, साठ वर्ष : एक रेखांकन ! पुरस्कार : 1960 में कला और बूढा चाँद पर साहित्य अकादेमी पुरस्कार, 1961 में पद्मभूषण की उपाधि, 1965 में लोकायतन पर सोवियत लैंड नेहरु पुरस्कार, 1969 में चिदंबरा पर भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार ! 28 दिसम्बर 1977 को देहावसान !

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