Critical analysis on Sāhityaratnākara of Dharmasūri

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Pratibhā Prakāśana, 2003 - Sanskrit poetry - 273 pages
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Study of Sāhityaratnākara of Dharmasūri, 16th cent., work on Sanskrit poetics.

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अज अत अति अथ अधि अप अपि अब अभी अम अयं अर्थात् अलम अव इति उदाहरण उप उम एते एब एल एव एवं और का का०प० काव्य कि किन्तु किमपि किय की कै को खा०र० गुण गुणा चु चेति जा जैव ड़०खा०र० तत् तत्र तत्व तथ तथा तदैव तब तम तल तव तस्य ति तु ते तेन तो दृश्यते द्विधा धप धर्म धर्मपाल धर्ममरे धर्मसारे न च न तु नाम नि पति पतीयते पद पदम पदार्थ परन्तु परस्पर पल पवई पश्यते पाते पुन पृ प्रतीति भा०र० भाव भी भेद मत मति मय मा०र० मृ० मैं यत् यथा यदि यब यम यमन यमृ० यया यर यल यश यस यह यहि या रस रसम रा राम रामायण रावण लक्षण लक्षणम् लक्षणों लक्षपानि वय वर्तते विज विना विशेष शवयते सह सा सा०र० स्वयं हि ही हूँ हेमचन्द्र है हैं

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