Daśā-padārthī: Vaiśeṣikanikāyadaśapadārthaśāstram

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Śrīraṇavīrakendrīyasaṃskr̥ta-Vidyāpīṭham, 1977 - Vaiśeṣika - 62 pages
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अतेन अस्य आत्ममनसा आत्मसमवेत आत्मा इतराणि इति है इला ईई एक एका एतस्य एव एवं और कणाद कति वा कर्म कर्मणा कर्माणि कश्चन का कानि कारण किन्तु कृत के ते के वा के सू को नाम गुण गुणा गुणी च है चत्वारि जम्मू जा डा० तत्र तथा तस्य तावत तु ते खलु तेजा तो दशप० है दशपदायों दशपदार्थी दिविधा दृश्यते द्रवत्व द्रव्यगुणकर्मसु नव नश्यति पदार्थ पु० पुन पुना पुरा पुराण पूर्व पृ० प्रकारेण प्रत्यक्षा प्रत्यय प्रथम प्रयत्न प्रशस्त प्रशस्तपाद पू० भवति है भवन्ति भूयते मन मुक्तावली मेन यथा यदा रा रावण रूपए लक्षण वर्तते वा है विभागकारर्ण विभागा विशेष शक्यते शब्द शेयर श्री सं संमाव्यते संयोगा संस्कार संस्कारो संस्कृत सत्ता समवाय समवेत सह सा सामान्य स्पर्श स्वीकृतरा है अत्र है का है कि है के है को नाम है ते है दशप० है प्रशस्तपाद है है हैं होते

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