G̲h̲azala-- Dushyanta ke bāda, Volume 2

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Vāṇī Prakāśana, 2003 - Poetry - 479 pages
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Selected ghazals by 20th century Hindi authors.

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Contents

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अगर अनेक संस्थाओं द्वारा अपना अपनी अपने अब अभी अम इक इस उर्दू उस उसे एक एवं और कब कभी कर करना कल कहीं क्या क्यों का कि किसी की कुछ के लिए को कोई खुद गए घर जब जा जाए जाता जाने जैसे जो डिन्दगी तक तरह तुम तू तेरी तो था थी थे दर्द दिन दिया दिल दिल्ली दुनिया दे देख देखा दो नगर नहीं है नाम ने पत्र-पविकाओं में पता पर पल पंजाब प्यार प्रकाशन पे फिर बया बस बहुत बात भर भी मगर मत मुझे मेरा मेरी मेरे में में रचनाएँ प्रकाशित मैं यम यया यर यह यहीं या ये रहा रहा है रही रहे रात लगता है लगे ले लेकिन लोग वि शिक्षा सब सम्पति सम्पर्क सर सहित संस्थाओं द्वारा सम्मानित सा साथ से हम हमने हमें हर हिन्दी ही ही नहीं हुआ हुई हुए हूँ हैं हो गए हो गया होगा होता होती

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