Gandhadīpa

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Aśoka Prakāśana, 1966 - 80 pages
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Contents

३ उदासीन के प्रति
६ मनु का पश्चात्म
० ओ बहरे शासन

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अपना अपनी अपने अब अब कोटि-कोटि जनता आज आती है आया इस उदास उस उसको और कब कभी कर करता करती करते करने कवि कविता क्या क्यों क्षण का कि किया किस किसी की कुछ के कैसे को गया गीत घर चीनी छोड़ जग जब जल जाता है जाती जाये जिसके जिसने जीवन की जो तक तब तुम तू तो था थी थे दिन दिया दीपावली दु:ख दुश्मन देश दो धरती धरा नभ नहीं है निज निराला नीले ने पर प्यार फिर फूल बन बस बिना भर भारत भी मत मन में मर मानव मिट्टी मुक्त मुझसे मेरी मेरे में मैं मैंने यदि यह यहाँ यही ये यों रहे राम रे लगता है लिए लेकिन वह वाले वे सदा सब सभी स्वयं सावधान होकर आगे सुख सुन्दर से हम हमारा हर ह्रदय हाथ हाथों हित ही हुआ हुए हूँ है है हैं हो गई होगा होली

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