Gandhi Ji Bole Theiy

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Rajkamal Prakashan, Sep 1, 2008 - 240 pages
मॉरिशस के सुप्रसिद्ध हिन्दी कथाकार अभिमन्यु अनत का यह उपन्यास उनकी बहुचर्चित कथाकृति लाल पसीना की अगली कड़ी है। ‘लाल पसीना’ मॉरिशस की धरती पर प्रवासी भारतीयों की शोषणग्रस्त जिन्दगी के अनेकानेक अँधेरों का दर्दनाक दस्तावेज है, लेकिन इस उपन्यास में हम उसी जिन्दगी और उन्ही अँधेरों से चेतना का एक नया सूर्योदय होता हुआ देखते हैं। हजारों-हजार शोषित मजदूर-किसानों के बीच होनेवाला यह सूर्योदय शिक्षा, संगठन और संघर्ष का प्रतीक है और इसी का मूर्त रूप है उपन्यास का नायक ‘परकाश’। शैशव में उसने दक्षिण अफ्रीका से भारत लौट रहे गाधीजी को सुना था। उन्हीं के आदर्श से वह प्रेरित है - अन्याय के अस्वीकार के लिए शिक्षा और राजनीति का स्वीकार तथा मानवोचित अधिकारों की प्राप्ति के लिए संगठन और संघर्ष। इस अन्तर्वस्तु को उजागर करने के क्रम में लेखक ने जिस वातावरण, घटनाओं और चरित्रों की सृष्टि की है, वह अविस्मरणीय है। आज से सत्तर-अस्सी वर्ष पूर्व के मॉरिशसीय समाज में भारतीयों की जो स्थिति थी - मर्मान्तक गरीबी के बीच अपनी ही बहुविध जड़ताओं और गौरांग सत्ताधीशों से उनका जो दोहरा संघर्ष था - उसे उसकी समग्रता में हम यहाँ बखूबी महसूस करते हैं। मदन, परकाश, सीता, मीरा, सीमा आदि इस उपन्यास के ऐसे पात्र हैं, जिनके विचार, संकल्प, श्रम, त्याग और प्रेम-सम्बन्ध उच्च मानवीय आदर्शों की स्थापना करते हैं और जो किसी भी संक्रमणशील जाति के प्रेरणास्रोत हो सकते हैं।
 

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adhi sia good boy

Contents

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Common terms and phrases

अगर अधिक अपनी अपने अब आगे आज आदमी आप आया इस उन उस उसका उसकी उसके उसने उससे उसी उसे एक और कभी कर करने कह का काम किया किसी की की ओर कुछ के बाद के बीच के लिए के साथ के सामने को कोई कोठी क्या क्यों गया था गये गाँव घर चाचा जब जा जाता जाने जिस जो तक तब तरह तीन तुम तुम्हारे तुम्हें तो था कि थी थे दिन दिया दो दोनों नहीं पर परकाश परकाश ने पहले पास फिर बस्ती बस्ती के बहुत बात बार भी भीतर मजदूर मजदूरों के मदन ने मीरा मीरा ने मुझे में मैं यह यहाँ रह रहा था रहा है रही रहीं रहे लगा लिया ले लेकिन लोग लोगों को वह वहाँ वे शुरू सकता सभी समय सीता सीमा से से कहा हम हर हाथ ही हुआ हुई हुए हूँ है कि है है हैं हो होगा होता

About the author (2008)

अभिमन्यु अनत जन्म: 9 अगस्त, 1937। मॉरिशस के प्रवासी भारतीय। हिंदी कथाकार और कवि के रूप में मॉरिशस ही नहीं भारत में भी विशिष्ट ख्याति अर्जित की है। अपनी रचनाओं के माध्यम से उन्होंने मॉरिशस में न केवल प्रवासी भारतीयों की अस्मिता को नई पहचान दी है बल्कि वहाँ भारतीय संस्कृति और हिंदी भाषा व साहित्य का प्रचार-प्रसार भी किया है। उपन्यास, कहानी, कविता, नाटक, जीवनी आदि विधाओं में करीब 55 पुस्तकें प्रकाशित तथा 50 से अधिक हिंदी नाटकों का लेखन। प्रमुख रचनाएँ: उपन्यास: लाल पसीना, गांधीजी बोले थे, और नदी बहती रही, एक बीघा प्यार। कहानी-संग्रह: खामोशी के चीत्कार। कविता-संग्रह: नागफनी में उलझी साँसें। नाटक: देख कबीरा हाँसी।

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