Gayanganga Sada Gita

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Northern Book Centre, Jan 1, 2008 - 124 pages
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Contents

Section 1
Section 2
Section 3
Section 4
Section 5
Section 6
Section 7
Section 8
Section 11
Section 12
Section 13
Section 14
Section 15
Section 16
Section 17
Section 18

Section 9
Section 10
Section 19
Section 20

Common terms and phrases

अत अन्य अपना अपनी अपने अम इन्दियों इस उस उसकी उसके उसी के एक ही और कद कर करता कर्ता कर्म का काने काम कामना कार्य की कृष्ण के के अ को क्रिया गीता चल जब जा जाता जाप जाल जिसके जिसमें जिससे जीबन जीवन जैसा जो ज्ञान ज्ञानगंगा तक तुम तो दरभंगा दूर दृश्य दे देख देखता देखते धर्म नहीं नाम से निज निर्मल ने पर परम परमात्मा पल पे पेम प्रकृति प्रभु प्राण प्रान प्रिय फिर बने बल बह भगवान भर भाव मत मन मात्र मे में भी मैं यम यया यल यह यही यहीं या ये रस रहा रही रहे राग लिए ले लेकर लेखक ने वरदान वह वही वहीं वा विष्णु वे श्रीकृष्ण संसार सकल सत्य सदा गीता सब में साकार साथ सामने सारे सुख से स्वयं हम हमारा हमारी हमारे ही है हुम है हैं हो होकर होता होती होते होने

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