Gems of Jaina Wisdom: Syādvada-siddhi of Vādibhasimha Sūri

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Keladevi Sumatiprasad Trust, 2007 - Religion - 160 pages
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Classical texts of Jainism.

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Contents

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अत अथवा अनुमान अनेक अन्य अपने अपेक्षा अभाव अभेद अहिंसा आत्मा आदि इति इस इसमें ईश्वर उक्त उनका उनके उनमें उस उसका उसके उसी उसे एक एव एवं और इसलिए और न करके करने कर्ता कहा का का प्रसंग कारण कार्य किया है की तरह की सिद्धि के के लिए को कोई क्योंकि गया है चाहिए जब जाए जाता है जिस जीव जो ज्ञान तक तत ततो तथा तब तु तो दूसरे दो दोनों दोष द्वारा धर्म न हि नहीं है नहीं होता नाम नित्य निराकरण ने पक्ष पर पूर्व प्रकरण प्रकार प्रत्यक्ष प्रमाण फल बन बिना बुद्ध भवेत् भिन्न भी भेद माना में में भी यदि यह यहीं या ये रूप वस्तु वह वा वादीभसिंह वाला वे वेद शरीर सकता है समय समवाय सम्भव सर्वज्ञ सर्वथा सा सारे सिद्ध सोमदेव स्वीकार ही हे हेतु है और है कि हैं हो सकता होता है होती होने से

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