Hindī kāvya meṃ śṛṅgāra paramparā aura mahākavi Bihārī

Front Cover
Vinoda Pustaka Mandira, 1959 - Hindi poetry - 455 pages
0 Reviews

From inside the book

What people are saying - Write a review

We haven't found any reviews in the usual places.

Contents

Section 1
108
Section 2
Section 3

26 other sections not shown

Common terms and phrases

अत अधिक अनेक अन्य अपनी अपने आगे आदि आधार इन इस इसके उनका उनकी उनके उसकी उसके उसे एक एवं ओर और कबीर कर करता करते हुए करना करने कवि कवियों ने का का चित्रण कालिदास काव्य किया है किसी की की दृष्टि से कुछ कृष्ण के कारण के रूप में के लिये केशव को कोई क्षेत्र गई गया है जब जयदेव जा जाती जीवन जो तक तथा तो था थी थे दिया दो दोनों दोहों द्वारा नहीं नायक नायिका ने पर प्रथम प्रभाव प्राप्त प्रेम प्रेम का प्रेयसी फिर भी बहुत बात बिहारी बिहारी के भाव भी भेद मिलता है में भी यदि यह यहाँ या युग रस राम रामायण वर्णन वह विकास विद्यापति विभिन्न विवाह वे संस्कृत सकता सकते सतसई सभी सम्बन्ध साथ साहित्य सूरदास सौन्दर्य स्थान हम हिन्दी ही हुआ हुई है कि है किन्तु हैं होता है होती होते होने ह्रदय

Bibliographic information