Hindi Ke Nirmata

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Bhartiya Jnanpith
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यह पुस्तक हिंदी साहित्य के आरंभिक रचनाकारों की बेहद दिलचस्प झांकी प्रस्तुत करती है. इस पुस्तक में माध्यम से हम हिंदी के उन प्रारंभिक विभूतियों से परिचित होते हैं जो दुहरे स्तर पर हिंदी के लिए काम कर रहे थे. वे एक तरफ हिंदी भाषा का संस्कार कर रहे थे तो दूसरी तरफ हिंदी में महत्वपूर्ण साहित्य का सृजन भी कर रहे थे.
यह पुस्तक राजा "शिवप्रसाद 'सितारेहिंद'" से लेकर "धूमिल" तक के साहित्यिक अवदान की चर्चा करते हुए हिंदी साहित्य के विस्तृत विस्तार को बड़ी ही ईमानदारीपूर्वक प्रस्तुत करती है. हिंदी साहित्य विषयक समझ विकसित करने के लिए पढी जाने वाली जरूरी पुस्तकों में से एक.
 

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