Jīvana ke gāna

Front Cover
Ātmārāma, 1981 - Hindi poetry - 102 pages
0 Reviews

From inside the book

What people are saying - Write a review

We haven't found any reviews in the usual places.

Contents

Section 1
Section 2
Section 3
Copyright

1 other sections not shown

Common terms and phrases

अथवा अपना अपनी अपने अब अभी आज कवि इन इनमें इस उजाला उस उसे एक और कंकाल कब कभी कयों कर करता करते करना करने कला कवि कह का कारण कितनी किसी की कुछ के लिए केवल को कोई क्या क्योंकि गए गा पाया हूँ गान चारों ओर चाहे चुका जग जब जा जाना पथिक कहीं जीवन के जो तक तथा तब तिल तुम तो था थी दुख देख न जाना पथिक नहीं है ने पथ पर पथ भूल न पर प्यार प्रकार प्रगतिवाद फिर बन भर दो भी भूल न जाना भेरी मत मधुर मानव मिला मुझको मुझे में मेरा मेरी मेरे मैं मैं गा पाया मैंने यदि यह यहाँ या रह रहा है रही रहीं रूप वह विश्व वे सकता सब समाज साथ सामाजिक सुख से स्वर हमारे हार ही हुआ हूँ हूँ अपने जीवन हृदय है कि हैं होंगे होगा होगी

Bibliographic information