Jaina-śilįlekhasaṅgrahaḥ, Volume 5

Front Cover
Śrīmāṇikacandra Di. Jainagranthamālāsamiti - Inscriptions, Jaina
0 Reviews

From inside the book

What people are saying - Write a review

We haven't found any reviews in the usual places.

Other editions - View all

Common terms and phrases

१५ १७ १८ अजमेर अन्य आचार्य इन इस में इस लेख में इसी उक्त वर्ष उत्तरप्रदेश उपर्युक्त उस ऐसा और कन्नड का उल्लेख है का नाम का वर्णन है कि किया की स्थापना कुछ के पादपीठ पर के पुत्र के लिए के लेख के शिष्य के सन् को क्र० गण गये गुरुवार चालुक्य जैन जो तथा तिथि तो था थी थे दतिया दान दिया दो द्वारा नं० नहीं नाम अंकित है नासिक ने पर यह लेख पर है पादपीठ पर यह पृ० प्राप्त बन्दर भी मध्यप्रदेश मन्दिर महाराष्ट्र में इस में वर्णन है में है मैसूर यह लेख है ये रविवार राजस्थान राजा रि० इ० ए० लिपि लेख क्र० लेख में विवरण वे वैशाख शक शु० सं० संघ संवत्सर संस्कृत-नागरी सत् सदी की सन् सब समय से सोनागिरि सोमवार ही हुआ हुई हुए है है हैं

Bibliographic information