Jaina darśana aura Muni Vidyāsāgara

Front Cover
Āditya Pabliśarsa, 2001 - Digambara (Jaina sect) - 378 pages
0 Reviews
Study on the works of Ācārya Vidyāsāgara, contemporary Jaina saint and his contributions to Jaina religion and philosophy.

From inside the book

What people are saying - Write a review

We haven't found any reviews in the usual places.

Contents

Section 1
1
Section 2
27
Section 3
68

11 other sections not shown

Common terms and phrases

अत अता अध्यात्म अनेक अप अपना अपनी अपने अब अभिव्यक्ति अभी अल आचार्य श्री आत्मा आदि इन इफ इस उन उनके उस उसे एक एल एवं कवि का कारण काव्य की के अनुसार के लिए को गया है गुण ग्रन्थ जब जा जाता है जाती जाने जिन्तु जिया है जिस जी जीव जीवन जैन दर्शन जैन धर्म जो डान तत्व तथा तभी तल तीन तो दिगम्बर दिया दी दृष्टि दो द्वारा ध्यान नहीं नहीं है ने पद पर पल पृ प्रकार प्राप्त बन बना बनी बने बल बाए बार भाव भावना भी मन मानव मुनि मुनि श्री में मैं मोक्ष यता है यदि यने यम यमन यया यर यल यह यही यहीं या ये रहा रहे ले वह विषय शब्द शब्दों शरीर शाक्य शीर्षक श्री ने श्री विद्यासागर सत्य समय से ही हुआ हुई हुए है और है जि हैं होता है होती होते होना होने

Bibliographic information