Jaina darśana aura vij˝āna

Front Cover
Jaina Viśva Bhāratī Iṃsṭīṭyūṭa, 1992 - Religion - 355 pages
0 Reviews
Articles on Jaina philosophy and science.

From inside the book

What people are saying - Write a review

We haven't found any reviews in the usual places.

Contents

Section 1
Section 2
Section 3

16 other sections not shown

Common terms and phrases

अणु अधिक अनन्त अनेक अन्य अपनी अपने अस्तित्व आकाश आज आत्मा आदि इन इस प्रकार इसका उस उसका उसके उसे ऊर्जा एक ऐसा कर करता है करना करने कहा का काल किन्तु किया किसी की कुछ के आधार पर के द्वारा के रूप में के लिए के साथ केवल को कोई गति गया है जब जा सकता है जाता है जाती जाते जैन दर्शन जो ज्ञान तक तथा तब तो था दृष्टि से दो दोनों द्रव्य नहीं है नियम ने पदार्थ पर परमाणु प्रोटीन फिर बन बहुत बात भी भौतिक मन मनुष्य यदि यह या ये रहा है वह वाले वास्तविकता विज्ञान विश्व विषय में वे वैज्ञानिक व्यक्ति शक्ति शराब शरीर सकता है सकती सकते सत्य समय सिद्धांत से स्पष्ट स्वीकार हम ही हुआ हुए है और है कि है तो है है हैं हो जाता है हो सकता होगा होता है होती होते हैं होने

Bibliographic information