Jainadarśana meṃ niścaya aura vyavahāra naya, eka anuśīlana

Front Cover
Pārśvanātha Vidyāpīṭha, Jan 1, 1997 - Jaina logic - 284 pages
0 Reviews

From inside the book

What people are saying - Write a review

We haven't found any reviews in the usual places.

Other editions - View all

Common terms and phrases

अत अता अन्य अपने अभाव अर्थात् आगम आचार्य आत्मा आत्मा के आदि इन इस प्रकार इसलिए इसी उत्पन्न उदय उपदेश उस उसका उसके उसे एक एवं ऐसा कथन कर करता है करते हुए करना करने कर्म कहते है कहा गया कहा है का कार्य किन्तु किया गया है किया है किसी की अपेक्षा के कारण के द्वारा के लिए के साथ केवल को क्योंकि गोक्षमार्ग जब जयपुर जा जी जीव जीव के जैसे जो तथ तो था दिया दोनों द्रव्य धर्म नय नहीं है नहीं होता नाम निक्षय और व्यवहार निक्षयनय निमित्त निषेध ने पर परिणाम बतलाया भाव भी भेद में मोक्ष यदि यर यह या ये वने वह विषय वे व्यवहारनय शब्द शरीर शुद्ध संज्ञा सकता सत्य साधक सिद्ध स्पष्ट स्वभाव स्वयं ही हेतु है और है कि है म हैं हो जाता है होता है होती होते होना होने से

Bibliographic information