Lokakavi Tulasi

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Himanshu Prakashan, 1977
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अत अति अधिक अध्यात्म रामायण अनेक अपनी अपने अयोध्या आदर्श आदि इन इस इसी उनकी उनके उन्हें एक एव एवं ओर कथा कर करके करता करती करते है करना कवि तुलसी कवि ने कहते का प्रयोग का वर्णन काण्ड काव्य किया है की की है के लिये के साथ केवल कैकेयी को कोई गई गुरु चर्चा जब जाता है जाते जीवन जो तथा तुलसी ने तुलसीदास ते तो था थे दशरथ दिया दृष्टि दोनों द्वारा धर्म नर नहि नही नहीं है नाम नारी निज पर पार्वती पुराण प्र प्रकार प्रसंग बार भक्ति भरत भाषा मन महाभारत मानस में में भी मैं यह या रस राजा राम के रामचरित रामचरितमानस रामायण में रावण लक्ष्मण लोक वह विभीषण विष्णु वे वेद संस्कृत सब सभी समय सीता सीता के सुख सुग्रीव से सो हनुमान ही हुआ है हुए है और है कि है है हैं हो होकर होता है होते होने

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