Manusmr̥ti: Bhāratīya ācāra-saṃhitā kā viśvakośa

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Śāśvata Sāhitya Prakāśana, 1997 - Hindu law - 504 pages
Classical work, with Hindi commentary, on ancient Hindu law.

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अत अथवा अधिक अधिकार अपनी अपने आदि आप इन उनके उस उसका उसके उसी उसे एक ओर कभी कर करके करता है करते करना चाहिए है करनी करने वाले करने से करे कर्म का कारण किया किये किसी की कुछ के रूप में के लिए के समान के साथ कोई क्षत्रिय गया च है चाहिए और जल जा जिस जो ठी तक तथा तीन तु तो था दण्ड दान दिन देना चाहिए देने द्वारा धन धर्म नहीं नहीं करना चाहिए ने पकार पति पर पाप पिता पुत्र पुरुष प्राप्त ब्राह्मण भाग भी भोजन मनु मनुस्मृति यदि यह है कि या रवी रा राजा को वने वर्ण वर्ष वह वाला वाली विवाह वे वेद वैश्य व्यक्ति शरीर सभी समय से से उत्पन्न ही हुए हे है और है न है है है है है हैं हो जाता है होकर होता है होती होते होना होने पर

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