Na phūla caṛhe, na dīpa jale

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Suruci Prakāśana, 1998 - India - 208 pages
Based on the partition of India in 1947; translated from Marathi.

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अपनी अपने अब अर्जुन अर्जुन जी आज आप आया आये इस उन उनका उनकी उनके उन्हें उन्होंने उस उसका उसकी उसके उसने उसे एक और कर करते करना करने का कि किन्तु किया किसी की की ओर कुछ के पास के लिए के साथ को कोई क्या क्यों क्योंकि गयी गये गीता घर चाहिए जब जा जाने जी जी ने जो ठीक तक तथा तुम तेजराम तो था थे दिन दिया दिल्ली दी दो दोनों नहीं नहीं है नाम ने पंजाब पर पहले पाकिस्तान प्रकार फिर बहुत बात बाहर भारत भी मन माधवराव जी मुझे मुसलमान में मेरे मैं यदि यह यहाँ रहा था रहा है रही थी रहे थे रहे हैं लगा लगे लाहौर लिया ले लोग लोगों वह वहाँ वाले वे श्रीनगर सब सभी समय सिख सियालकोट से हम हमारे हमें हाथ हिन्दू ही हुआ हुई हुए हूँ है है और हैं हो गया होगा होने

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