Nayī kavitā ke nāṭya-kāvya

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Śodha-Prabandha Prakāśana, 1977 - Hindi drama - 404 pages
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अधिक अनुभूति अनेक अपनी अपने अर्थ अलंकार अश्वत्थामा आदि आधार इस प्रकार इसी उनके उस उसकी उसके उसे एक ओर कथानक कर करके करता है करते हैं करना कवि ने कविता कहा का का प्रयोग काव्य किन्तु किया किया गया है किया है किसी की कुछ कृपाचार्य कृष्ण के कारण के रूप में के लिए के साथ केवल को कोई जाता है जिस जीवन जो डॉ० तक तथा तुक तो था दिया दुर्योधन दो दोनों द्वारा धर्मवीर भारती नहीं नहीं है नाटक नाटकीय नाट्य-काव्य पर पात्र पात्रों पृ० प्रतीक प्रभाव प्रस्तुत बिम्ब ब्रह्मा भारती भाषा भी मन महाभारत मूल में भी यह यहाँ या युग युद्ध रहा है राजा राम लय वह वही वे व्यक्त शिव संवादों सभी सरोवर सीता से स्वयं ही हुई हुए है २ है और है कि है है हैं हो होकर होता है होती होते होने के

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