Pānini vyākarana meṃ prajanaka pravidhiyām̐

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Kendrīya Hindī Saṃsthāna, 1976 - Sanskrit language - 50 pages

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अथवा अनिवार्य अनुसार अपने अब अर्थ अर्थात् अष्टाध्यायी आगरा आवश्यक इत्यादि इन इस तरह इसके इसी उदाहरण उनके उपगुच्छ ऊपर एक ऐसे कतृ कर करते करना करने कर्म का प्रयोग कारक किया गया है किसी की अभिव्यक्ति की दृष्टि से की प्रसंगानुक्रमणी कुछ कुमार के आधार पर के बाद के लिए के साथ को कोई क्योंकि क्रमवीक्षण क्रिया गई गर्ग चयन चालक गुच्छ जब जा जा सकता जाए जाएगा जो तक तथा तिड् तो दिया दी दो दोनों द्वारा धातु नहीं निर्णय निष्पत्ति ने पच् पद पदों पर पहले पाणिनि पाणिनि व्याकरण प्रकार प्रक्रिया प्रजनक प्रश्न प्रातिपदिक भाषिक भी यदि यह यहाँ या ये रूप रूप में रूपों लिया वाक्य वाले विकल्प विभक्ति विभिन्न व्याकरण व्याकरणिक शब्द संज्ञा संबंध संबद्ध सकती समस्त साथ ही सु सूत्र सूत्रों सूत्रों के स्पष्ट हम हमें हिंदी ही ही है हुआ है और है कि हैं हो जाता है होगा होता है होती

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