Parimal

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Rajkamal Prakashan, Jan 1, 2008 - 205 pages
महाकवि ‘निराला’ की युगांतरकारी कविताओं का अति विशिष्ट और सुविख्यात संग्रह है-परिमल! इसी में है तुम और मैं, तरंगो के प्रति, ध्वनि, विधवा,भिक्षुक,संध्या-सुन्दरी, जूही की कलि, बदल-राग, जागो फिर एक बार-जैसी श्रेष्ठ कविताएँ, जो समय के वृक्ष पर अपनी अमिट लकीर खिंच चुकी हैं! परिमल में छाया-युग और प्रगति-युग अपनी सीमाएँ भूलकर मनो परस्पर एकाकार हो गए हैं! इसमें दो-दो काव्य-युगों की गंगा-जमनी छटा है, दो-दो भावधाराओं का सहज्मुक्त विलास है!
 

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stupendous!! work by great suryakant Tripathi "Nirala" ji , i salute to him always

Contents

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Common terms and phrases

अतीत अनन्त अपना अपनी अपने अब अभी आज आया आयी आये इस उन उर उस उसके उसे एक एक बार एक ही ओर और कभी कर करता करती करते कविता कह कहाँ कहीं का कि कितने किन्तु किया किस किसी की कुछ के लिए केवल को कोई कोमल क्या क्यों गति गया गयी गये छन्द जग जब जाता जाती जाते जाने जीवन जैसे जो तक तब तरह तुम तुम्हारे तुम्हें तू तो था थी थे दिन दूर देख दो द्वार नयन नयनों नव नहीं निज ने पथ पर पार प्रकार प्रकृति प्रथम प्राण प्रिय प्रेम फिर भर भाव भाषा भी मन मुक्त मुख मुझे मृदु में मेरा मेरे मैं मौन यदि यह यहाँ यही या ये यौवन रहा है रही रूप ले वन वह विश्व वीर वे संसार सदा सब साथ साहित्य सुख सुन्दर सृष्टि से हाय हिन्दी ही हुआ हुई हुए हूँ हृदय है हैं हो होगा होता

About the author (2008)

सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' नराला का जन्म वसन्त पंचमी, 1896 को बंगाल के मेदिनीपुर जिले के महिषादल नामक देशी राज्य में हुआ। निवास उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले के गढ़ा कोला गाँव में। शिक्षा हाईस्कूल तक ही हो पाई। हिन्दी, बांग्ला, अंग्रेजी और संस्कृत का ज्ञान आपने अपने अध्यवसाय से स्वतन्त्र रूप में अर्जित किया। प्राय: 1918 से 1922 ई. तक निराला महिषादल राज्य की सेवा में रहे, उसके बाद से सम्पादन, स्वतन्त्र लेखन और अनुवाद-कार्य। 1922-23 ई. में 'समन्वय (कलकत्ता) का सम्पादन। 1923 ई. के अगस्त से 'मतवाला'—मंडल में। कलकत्ता छोड़ा तो लखनऊ आए, जहाँ गंगा पुस्तकमाला कार्यालय और वहाँ से निकलनेवाली मासिक पत्रिका 'सुधा' से 1935 ई. के मध्य तक सम्बद्ध रहे। प्राय: 1940 ई. तक लखनऊ में। 1942-43 ई. से स्थायी रूप से इलाहाबाद में रहकर मृत्यु-पर्यन्त स्वतन्त्र लेखन और अनुवाद कार्य। पहली प्रकाशित कविता : 'जन्मभूमि' ('प्रभा', मासिक, कानपुर, जून, 1920)। पहली प्रकाशित पुस्तक : 'अनामिका' (1923 ई.)। प्रमुख कृतियाँ : कविता-संग्रह : अनामिका, आराधना, गीतिका, अपरा, परिमल, गीतगुंज, तुलसीदास, कुकुरमुत्ता, बेला, अर्चना, नए पत्ते, अणिमा, रागविराग, सांध्य काकली, असंकलित रचनाएँ। उपन्यास : बिल्लेसुर बकरिहा, अप्सरा, अलका, कुल्लीभाट, प्रभावती, निरुपमा, चोटी की पकड़, भक्त ध्रुव, भक्त प्रहलाद, महाराणा प्रताप, भीष्म पितामह, चमेली, काले कारनामे, इन्दुलेखा (अपूर्ण)। कहानी-संग्रह : सुकुल की बीवी, लिली, चतुरी चमार, महाभारत, सम्पूर्ण कहानियाँ। निबन्ध-संग्रह : प्रबन्ध प्रतिमा, प्रबन्ध पद्म, चयन, चाबुक, संग्रह। संचयन : दो शरण, निराला संचयन (सं. दूधनाथ सिंह), निराला रचनावली। निधन : 15 अक्टूबर, 1961

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