Prameyaratnāvalī

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Śrīgadādharagaurahari Presa, 1981 - Philosophy - 121 pages
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Treatises on the basic tenets of the Dvaitādvaita and Acintyabhedābheda schools in Hindu philosophy.

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अथ अनन्तर अवतार आत्मा आप इति इत्यादि इस ईई ईश्वर उन उनके उपनिषद उस प्रकार एक एकमात्र एवं और कई कर करता है करते हैं करते हैं है करने करे कहते कहा का कि किया की कृष्ण के द्वारा केवल को गुण ग्रन्थ जगत जा जिस प्रकार जीव जो ज्ञान तत्र तत्व तथा तस्य तारतम्य तु तो था नहीं है निज नित्य ने पर परम परमेश्वर पुराण पुरुष प्रति प्रतिपादन प्रत्यक्ष प्रमाण प्रमेय प्राकृत बहा भक्ति भगवान भागवत भी भूति मुक्ति में उक्त है मेद मैं यथा ये रत्नावली रा रूप रूप में रूप से वस्तु विषय वेद शक्ति शब्द श्री श्रीकृष्ण श्रीहरि सं समस्त समान समूह सर्व सव से ही स्वयं स्वरूप हंई ही हुई हेतु है अथदि है इस है उस है एवं है वह है है हो होकर होगा होता है होता है है होती होते हैं होने से

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