Rājagīra-Haridvāra-Dillī-satsaṅga

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Akhila Bhāratīya Santamata-Satsaṅga-Prakāśana-Samiti, 1982 - Body, Mind & Spirit - 219 pages

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अन्दर अपने अपने को अवश्य आत्मा आप इन इस इसलिये इसी ईश्वर ईश्वर की उपनिषद उस उसको उसी ऊपर एक ऐसा कबीर कबीर साहब कर करके करता है करते करना करने करो कहते हैं कहा है का काम कारण किया किसी की की ओर कुछ कृष्ण के लिये केवल को कोई क्या गया गुरु गुरु नानक चाहिये जब जाता है जाते जाय जिस जैसे जो ज्ञान तक तथा तब तरह तुम तुलसीदास तो था थे देश धर्म ध्यान नहीं है ने कहा पर परम परमात्मा पहले प्रकाश फिर बहुत बात बाहर बिना बुद्धि भक्ति भगवान् भी मन मालूम में मैं यदि यह यहाँ ये योग रहे राम रूप लेकिन लोग वह वा वे वेद शब्द शरीर श्री संसार सकता सकते सन्त सब सभी साथ सुख सूक्ष्म से सो स्कूल हम ही हुआ हुए हूँ है और है कि है है होगा होता है होती होते होने

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